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Thursday, July 14, 2011

लालीवाव मठ में यज्ञ पूर्णाहुति से सम्पन्न भागवत कथा सप्ताह


लालीवाव मठ में यज्ञ पूर्णाहुति से सम्पन्न भागवत कथा सप्ताह
पार्थेश्वर चिंतामणि रूद्रार्चन महापूजा सम्पन्न
बांसवाड़ा, 14 जुलाई।

बांसवाड़ा के लालीवाव मठ में गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में सात दिनों से चली आ रही श्रीमद्भागवत कथा गुरुवार शाम यज्ञ पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हो गई।
इसके साथ ही चिंतामणि पार्थिवशिवलिंग महापूजा अनुष्ठान भी रूद्रार्चन यज्ञ के साथ सम्पन्न हो गया।
                                                                                                                                                                                       मठ परिसर में वैदिक ऋचाओं और पौराणिक मंत्रों के साथ लालीवाव पीठाधीश्वर महंत हरिओमशरणदास महाराज के सान्निध्य तथा प्रसिद्ध कर्मकाण्डी पं. इच्छाशंकर जोशी के आचार्यत्व में भागवत यज्ञ हुआ। इसमें मुख्य यजमान भौतिक शास्त्री अरुण साकोरीकर, श्रीमती आशा साकोरीकर, सह यजमान महेश राणा एवं राजेन्द्र टेलर आदि ने श्रीफल से पूर्णाहुति अर्पित की। इस दौरान पं. जयप्रकाश पण्ड्या, लक्ष्मीनारायण सुथार, निमेष मेहता आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया।

चिंतामणि पार्थेश्वर महापूजा विधान


इस अवसर पर तारापुर से आए साधकों भंवरलाल एवं श्रीमती धापू बाई तथा लालीवाव मठ के शिष्यों ने विधिविधान के साथ चिंतामणि पार्थिव शिवलिंग बनाकर उनका पूजन किया। गुरुवार को पं. जयप्रकाश पण्ड्या तथा अन्य शिव उपासकों ने रूद्रार्चन ऋचाओं के साथ पूजन-अर्चन किया।
मिट्टी के शिवलिंगों से विभिन्न मनोहारी यंत्र तथा देवी-देवताओं की आकर्षक प्रतिमाओं का सृजन किया गया।
भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का ज्वार
लालीवाव मठ में श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर श्रद्धालुओं का ज्वार उमड़ आया और विभिन्न कथाओं को सुनते हुए श्रद्धालु कई-कई बार कीर्तनों पर झूम उठे।
कथा के समापन पर मुख्य यजमान तथा सह यजमानों ने व्यासपीठ से कथावाचन कर रहे लालीवाव पीठाधीश्वर महंत हरिओमशरणदास महाराज का साफा बांध कर तथा श्रीफल एवं भेंट अर्पित कर सम्मान किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।
लालीवाव मठ परिवार के सदस्यों ने भी महंतश्री का स्वागत सत्कार किया।

इस अवसर पर भागवत समिति, श्री सिद्धि विनायक गणेश भक्त मण्डल की ओर से नटवरलाल सागवाड़िया, परमेश्वरलाल नागर, विनोद शाह, देवेन्द्र शाह, जैजेवन्ती वैष्णव, डॉ. दीपक द्विवेदी आदि ने शॉल, पुष्पहारों तथा श्रीफलों से महंतश्री का स्वागत अभिनंदन किया। संचालन शिक्षाविद् शांतिलाल भावसार ने किया।












लालीवाव मठ में गुरु पूर्णिमा महोत्सव शुक्रवार को

बांसवाड़ा, 14 जुलाई/सदियों से लोक आस्था के धाम रहे ऐतिहासिक लालीवाव मठ में गुरुपूर्णिमा महोत्सव शुक्रवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इसकी सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
लालीवाव मठ में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अनुष्ठान शुक्रवार को भोर में प्रातः पांच बजे गुरुगादी पूजन से शुरू होंगे। इसके बाद मध्याह्न 12 से दोपहर बाद 3 बजे तक दीक्षा दी जाएगी। शाम सात बजे भजन-कीर्तन और सत्संग होगा तथा रात आठ बजे महाआरती के साथ ही महोत्सव का समापन हो जाएगा।

Saturday, July 9, 2011

मनुष्य जन्म के लक्ष्य का चिंतन करें - हरिओमशरणरदास महाराज

मनुष्य जन्म के लक्ष्य का चिंतन करें - हरिओमशरणरदास महाराज
लालीवाव मठ में श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव
बांसवाड़ा, 9 जुलाई/‘‘मनुष्य की दुर्लभ योनि की प्राप्ति का लक्ष्य प्रभु की भक्ति और साक्षात्कार है। हर मनुष्य को अपने जन्म लेने के उद्देश्य को समझकर कार्य करना होगा। लक्ष्य प्राप्ति के बिना जीवन निरर्थक है।’’
यह उद्गार ऐतिहासिक लालीवाव मठ में गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को व्यासपीठ से लालीवाव पीठाधीश्वर महंत हरिओमशरणदास महाराज ने कथाअमृतवृष्टि करते हुए व्यक्त किए।



उन्होंने कहा कि भारतभूमि पर जन्म लेना दुर्लभ है, और ऐसे में मनुष्य योनि का संयोग मणि-कांचन योग है। भारत भगवान की अवतार भूमि है। कृष्ण भक्ति, शास्त्रों का श्रवण, अध्ययन-मनन आदि से दैवत्व और दिव्यत्व प्राप्त होता है। शास्त्रों में किसी की कथा का वर्णन नहीं है बल्कि उनमें सिद्धान्त हैं, लक्ष्य हैं, और वह है भगवान का अहर्निश स्मरण करना।
महाराजश्री ने कहा कि भगवान का अवतार सत्य की रक्षा के लिए होता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम एवं वृन्दावनबिहारी कृष्ण भगवान के अवतारों से हमें पिण्ड से ब्रह्माण्ड तक का सारा ज्ञान हो जाता है।
सत्संग से संवारे जीवन को
सत्संग को जीवन निर्माण का अनिवार्य अंग बताते हुए उन्होंने कहा कि जहां कहीं उपलब्ध हो, सत्संग का लाभ लेना चाहिए। सत्संग संतों के बीच ही मिलता है। सत्संग का मौका जीवन में कभी नहीं गंवाना चाहिए। इसी से नए जीवन का उदय होता है।
आरंभ में मुख्य यजमान अरुण साकोरीकर एवं श्रीमती आशा साकोरीकर तथा सह यजमान महेश राणा एवं राजेन्द्र राणा तथा भक्तों दयाराम सिंधी, गणेशलाल सोनी, नीरज आदि ने भागवत की पूजा की तथा व्यासपीठ का स्वागत किया।