Wednesday, July 12, 2017
Bhandara Gurupurnima 2017
गुरुपूर्णिमा महोत्सव भण्डारा 2017
प.पू. श्रीमहंत श्री हरिओमदासजी महाराज
तपोभूमि लालीवाव मठ, बाँसवाड़ा
Bhajan Sandhya 2017 Gurupurnima
प.पू. महामण्डलेश्वर श्री हरिओमदासजी महाराज के पावन सानिध्य में
गुरुपूर्णिमा महोत्सव भजन संध्या, तपोभूमि लालीवाव मठ
Tuesday, July 11, 2017
Kaliya Mardan at Tapobhumi Laliwav Math
कालिया दमन(मर्दन) (Gurupurnima Mahotsav 2017)
शहर के ऐतिहासिक तपोभूमि लालीवाव मठ में चल रही श्रीमद् भागवत कथा एवं गुरुपूर्णिमा महामहोत्सव के तहत हजारों भक्त प्रतिदिन यहां आ रहे हैं । इसके तहत भगवान पद्मनाभ के कालिया मर्दन की श्रृंगारित प्रतिमा में सर्पों द्वारा भगवान कृष्ण को ढंश मारना, भगवान द्वारा कालिया को मारना व बिजली की आवाज ने भक्तों को काफी आकर्षित किया हर कोई देखकर भाव विभोर हो जाता है ।
Aarti Gurupurnima 2017 at Tapobhumi Laliwav Math, Banswara (Raj.)
गुरुपूर्णिमा महामहोत्सव भगवान पद्मनाभ आरती, तपोभूमि लालीवाव मठ, बाँसवाड़ा
Kanya pujan at Tapobhumi Laliwav Math
गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर प. पू. महामण्डलेश्वर श्री हरिओमदासजी महाराज के पावन सानिध्य में
कन्या पूजन, तपोभूमि लालीवाव मठ, बाँसवाड़ा
Kaliya Mardan at Padmanabh Temple, Tapobhumi Laliwav Math, Banswara
कालिया दमन(मर्दन)
शहर के ऐतिहासिक तपोभूमि लालीवाव मठ में चल रही श्रीमद् भागवत कथा एवं गुरुपूर्णिमा महामहोत्सव के तहत हजारों भक्त प्रतिदिन यहां आ रहे हैं । इसके तहत भगवान पद्मनाभ के कालिया मर्दन की श्रृंगारित प्रतिमा में सर्पों द्वारा भगवान कृष्ण को ढंश मारना, भगवान द्वारा कालिया को मारना व बिजली की आवाज ने भक्तों को काफी आकर्षित किया हर कोई देखकर भाव विभोर हो जाता है ।
शहर के ऐतिहासिक तपोभूमि लालीवाव मठ में चल रही श्रीमद् भागवत कथा एवं गुरुपूर्णिमा महामहोत्सव के तहत हजारों भक्त प्रतिदिन यहां आ रहे हैं । इसके तहत भगवान पद्मनाभ के कालिया मर्दन की श्रृंगारित प्रतिमा में सर्पों द्वारा भगवान कृष्ण को ढंश मारना, भगवान द्वारा कालिया को मारना व बिजली की आवाज ने भक्तों को काफी आकर्षित किया हर कोई देखकर भाव विभोर हो जाता है ।
Sunday, July 2, 2017
Bhagwat katha - Tapobhumi Laliwav Math
भागवत सुनने से ही कल्याण: पं. अनिलकृष्ण
लालीवाव मठ में महामंडलेश्वर हरिओमदासजी महाराज के सानिध्य में कथा शुरू
शहर के सूरजपोल के लालीवाव मठ में गुरुपूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष्य में महामंडलेश्वर हरिओमदासजी महाराज के सानिध्य में शुरू हुई 7 दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के प्रथम दिन कथावाचक पं. अनिलकृष्णजी महाराज ने कहा कि वेदों का सार युगों से मानव तक पहुंचता रहा है। 'भागवत महापुराण' यह उसी सनातन ज्ञान का सागर है, जो वेदों से बहकर चली रही है, जो हमारे जड़वत जीवन में चेतन्यता का संचार करती है और जो हमारे जीवन को सुंदर बनाती है, वो भागवत कथा है। यह एक ऐसी अमृत कथा है, जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है।
कथा को सुनने और जीवन में अपनाने से संपूर्ण पापों का नाश होता है। आज मनुष्य उसी प्रभु को भूलकर इस संसार को अपना समझ बैठा है। चौरासी लाख योनियों में उत्थान दिलवाने वाली मानवरूपी जन्म ही कल्याणकारी है। जो हमें ईश्वर से मिलाती है। हमारे पूर्व जन्मों के करोड़ों पुण्य होने पर ही हम कथा काे सुनने का लाभ ले सकते हैं।इससे पूर्व मठ के प्रधान मंदिर भगवान पद्मनाभ से कथा पंडाल तक भागवत पौथीयात्रा निकाली गई। पौथी का पूजन इच्छाशंकरजी, पंडित समरत मेहता, पंडित घनश्याम द्वारा किया गया।
लालीवाव मठ में महामंडलेश्वर हरिओमदासजी महाराज के सानिध्य में कथा शुरू
शहर के सूरजपोल के लालीवाव मठ में गुरुपूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष्य में महामंडलेश्वर हरिओमदासजी महाराज के सानिध्य में शुरू हुई 7 दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के प्रथम दिन कथावाचक पं. अनिलकृष्णजी महाराज ने कहा कि वेदों का सार युगों से मानव तक पहुंचता रहा है। 'भागवत महापुराण' यह उसी सनातन ज्ञान का सागर है, जो वेदों से बहकर चली रही है, जो हमारे जड़वत जीवन में चेतन्यता का संचार करती है और जो हमारे जीवन को सुंदर बनाती है, वो भागवत कथा है। यह एक ऐसी अमृत कथा है, जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है।
कथा को सुनने और जीवन में अपनाने से संपूर्ण पापों का नाश होता है। आज मनुष्य उसी प्रभु को भूलकर इस संसार को अपना समझ बैठा है। चौरासी लाख योनियों में उत्थान दिलवाने वाली मानवरूपी जन्म ही कल्याणकारी है। जो हमें ईश्वर से मिलाती है। हमारे पूर्व जन्मों के करोड़ों पुण्य होने पर ही हम कथा काे सुनने का लाभ ले सकते हैं।इससे पूर्व मठ के प्रधान मंदिर भगवान पद्मनाभ से कथा पंडाल तक भागवत पौथीयात्रा निकाली गई। पौथी का पूजन इच्छाशंकरजी, पंडित समरत मेहता, पंडित घनश्याम द्वारा किया गया।
आराध्य के चिंतन से मिलता है आनंद- हरिओमदासजी
महामंडलेश्वरहरिओमदासजी महाराज ने कहा कि मानव सांसारिक वस्तुओं में सुंदरता ढूंढता है। सुंदर और भोग प्रदान करने वाली वस्तुओं को एकत्रित कर प्रसन्न होता है। भगवतप्रेमी अपने आराध्य के स्वरूप चिंतन में ही आनंदमय होता है। भगवान सर्वत्र हैं, जिन्हें इन भौतिक आंखों से देखा नहीं जा सकता है। इसके लिए स्वच्छ हृदय और पवित्र मानसिक आंखें चाहिए। हम भगवान को सिर्फ मुसीबत में याद करते हैं।
महामंडलेश्वरहरिओमदासजी महाराज ने कहा कि मानव सांसारिक वस्तुओं में सुंदरता ढूंढता है। सुंदर और भोग प्रदान करने वाली वस्तुओं को एकत्रित कर प्रसन्न होता है। भगवतप्रेमी अपने आराध्य के स्वरूप चिंतन में ही आनंदमय होता है। भगवान सर्वत्र हैं, जिन्हें इन भौतिक आंखों से देखा नहीं जा सकता है। इसके लिए स्वच्छ हृदय और पवित्र मानसिक आंखें चाहिए। हम भगवान को सिर्फ मुसीबत में याद करते हैं।
मठ में पार्थिव शिव पूजा शुरू
लालीवावमठ में रविवार को मिट्टी के बने पार्थेश्वर शिवलिंगों से निर्मित सूर्ययंत्र और देव प्रतिमाओं एवं यंत्रों के पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सुबह भगवान भोले का रुद्राभिषेक और लघुरुद्र किया गया। इसके पश्चात् भागवतजी और पार्थिव शिवजी की आरती सुभाष अग्रवाल, लोकेंद्र भट्ट, सुखलाल तेली, रमेश तेली, महेश राणा, अरविंद खेरावत, पुरुषोत्तम शर्मा, ईश्वरीदेवी द्वारा उतारी गई।
लालीवावमठ में रविवार को मिट्टी के बने पार्थेश्वर शिवलिंगों से निर्मित सूर्ययंत्र और देव प्रतिमाओं एवं यंत्रों के पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सुबह भगवान भोले का रुद्राभिषेक और लघुरुद्र किया गया। इसके पश्चात् भागवतजी और पार्थिव शिवजी की आरती सुभाष अग्रवाल, लोकेंद्र भट्ट, सुखलाल तेली, रमेश तेली, महेश राणा, अरविंद खेरावत, पुरुषोत्तम शर्मा, ईश्वरीदेवी द्वारा उतारी गई।
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