बांसवाड़ा प्राचीन लालीवाव मठ में
आयोजित श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग पर श्रद्धालु भाव विभोर होकर झूमे।
श्रीमद भागवत कथा कार्यक्रम के दौरान जैसे ही महंत हरिओम शरण दास महाराज
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग का वाचन करने लगे, तो श्रद्धालुओं ने नंद के
आनंद भयो....हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की....के जयकारों का उद्घोष
गुंजायमान किए। इस दौरान समूचा वातावरण कृष्ण भक्तिमय हो गया। महंत श्री ने
प्रवचन में कहा कि प्रभु की भक्ति व प्राप्ति किसी भी अवस्था मेें की जा
सकती है। जन्म मरण के बंधन से मुक्ति के लिए कर्मों के क्षय को अनिवार्य
बताते हुए कहा कि जब तक कर्मों का क्षय नहीं होगा। तब तक आवागमन का चक्र
बना रहेगा। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण को जगत का गुरु व भगवान शिव को जगत
का नाथ कहा गया है। इन दोनों की आराधना व भजन से सब कुछ प्राप्त किया जा
सकता है। महंतश्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईश्वरीय विधान को नहीं मानने
वाले,उल्लंघन व विरोध करने वाले लोग दूसरे जन्म में कष्ट पाते हैं। साथ ही
पूजा करते वक्त क्रोध करने से नैतिक मूल्य नष्ट हो जाते हैं। धर्म सभा में
नाथू भोई व मांगीलाल धाकड़ के परिवारजनों ने रुद्राभिषेक पूजन किया। वहीं
ईश्वर जोशी, सुखलाल तेली, लोकेंद्र भट्ट, विमल, दीपक तेली, शांतिलाल
भावसार, सत्यनारायण दोसी, के. गौतम, शिवा, राजेश, गोपाल आदि ने व्यास पीठ
पर बिराजित महंत हरिओमशरण दास महाराज का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
Thursday, July 18, 2013
Wednesday, July 17, 2013
भागवत कथा में सजाई भगवान विष्णु की झांकी
श्रीमद् भागवत कथा मर्मज्ञ महंत
हरिओमशरणदास महाराज ने कहा है कि ईश्वर का अपने हृदय में निवास स्थिर करने
के लिए ईश्वरीय गुणों को आत्मसात करना जरूरी है। हमें भूतकाल को भूलकर
वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए-। साथ ही सृष्टि में बदलाव लाना चाहिए-,जैसा
भाव होगा वैसी दृष्टि बनेगी, ब्रह्म दृष्टि बनने पर सभी में ईश्वर दिखता है
। भगवान से हमें मुक्ति का पद मांगना चाहिए। संसार में सभी जीव परमात्मा
के अंश है । सभी में परमात्मा को देखने वाला विद्वान होता है । जिसकी
दृष्टि में शुद्धता नहीं होती है वह इस संसार में पूजा नहीं जाता है
अर्थात् शुद्धता से ही सबका प्रिय बना जा सकता है। मनुष्य की सभी वासनाएं
परिपूर्ण नहीं होती हैं । भगवान को प्राप्त होने से प्राणी तृप्त हो जाता
है ।
अश्वत्थामा की कथा का उद्धरण देते हुए महाराज ने कहा कि पाण्डवों के पुत्रों का वध तक कर देने वाले अश्वत्थामा को द्रौपदी ने ब्राह्मण पुत्र एवं गुरु पुत्र हो जाने से क्षमा कर दिया और दया को अपनाया। इसलिए भगवान की वह कृपा पात्र बनी रही। उन्होंने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षण में भगवान का स्मरण बना रहना चाहिए तभी जीवनयात्रा की सफलता संभव है। दु:खों में ही भगवान को याद करने और सुखों में भूल जाने की प्रवृत्ति ही वह कारक है। जिसकी वजह से आत्मीय आनंद छीन जाता है। कुंती ने इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण से मांगा कि जीवन में सदैव दु:ख ही दु:ख मिले ताकि भगवान का स्मरण दिन-रात कर सकें। पापकर्म में रत और पापी व्यक्ति के अन्न को त्यागने पर बल देते हुए महाराज ने भीष्म पितामह और द्रौपदी के संवाद का उदाहरण दिया और कहा कि स्वयं पितामह ने स्पष्ट किया था कि पापी दुर्योधन का अन्न खाने से उनकी मति भ्रष्ट हो गई थी। इसलिए जो व्यक्ति दुष्ट है, पापी है उससे संबंध होने का अर्थ है भगवान से दूरी, ज्ञान और विवेक से दूरी। ऐसे दुष्ट व्यक्तियों का संग किसी को भी, कभी भी डूबो दे सकता है। सज्जनों को चाहिए कि दुष्ट व्यक्तियों के संग और व्यवहार से दूरी बनाए रखें।
पार्थिवेश्वर शिवलिंगों से बनाया यंत्र
लालीवाव मठ में चल रहे आठ दिवसीय गुरुपूर्णिमा महोत्सव के अन्तर्गत बुधवार को मिट्टी के बने पार्थिवेश्वर शिवलिंगों से निर्मित यंत्र और अन्य देव प्रतिमाओं एवं यंत्रों के पूजन के लिए श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहा। पं. ललित पाठक के सान्निध्य में साधकों के समूहों ने यंत्र का निर्माण किया।
बांसवाड़ा. भागवत कथा के दौरान भगवान की सजाई गई झांकी।
अश्वत्थामा की कथा का उद्धरण देते हुए महाराज ने कहा कि पाण्डवों के पुत्रों का वध तक कर देने वाले अश्वत्थामा को द्रौपदी ने ब्राह्मण पुत्र एवं गुरु पुत्र हो जाने से क्षमा कर दिया और दया को अपनाया। इसलिए भगवान की वह कृपा पात्र बनी रही। उन्होंने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षण में भगवान का स्मरण बना रहना चाहिए तभी जीवनयात्रा की सफलता संभव है। दु:खों में ही भगवान को याद करने और सुखों में भूल जाने की प्रवृत्ति ही वह कारक है। जिसकी वजह से आत्मीय आनंद छीन जाता है। कुंती ने इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण से मांगा कि जीवन में सदैव दु:ख ही दु:ख मिले ताकि भगवान का स्मरण दिन-रात कर सकें। पापकर्म में रत और पापी व्यक्ति के अन्न को त्यागने पर बल देते हुए महाराज ने भीष्म पितामह और द्रौपदी के संवाद का उदाहरण दिया और कहा कि स्वयं पितामह ने स्पष्ट किया था कि पापी दुर्योधन का अन्न खाने से उनकी मति भ्रष्ट हो गई थी। इसलिए जो व्यक्ति दुष्ट है, पापी है उससे संबंध होने का अर्थ है भगवान से दूरी, ज्ञान और विवेक से दूरी। ऐसे दुष्ट व्यक्तियों का संग किसी को भी, कभी भी डूबो दे सकता है। सज्जनों को चाहिए कि दुष्ट व्यक्तियों के संग और व्यवहार से दूरी बनाए रखें।
पार्थिवेश्वर शिवलिंगों से बनाया यंत्र
लालीवाव मठ में चल रहे आठ दिवसीय गुरुपूर्णिमा महोत्सव के अन्तर्गत बुधवार को मिट्टी के बने पार्थिवेश्वर शिवलिंगों से निर्मित यंत्र और अन्य देव प्रतिमाओं एवं यंत्रों के पूजन के लिए श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहा। पं. ललित पाठक के सान्निध्य में साधकों के समूहों ने यंत्र का निर्माण किया।
बांसवाड़ा. भागवत कथा के दौरान भगवान की सजाई गई झांकी।
Tuesday, July 16, 2013
कथा में प्रत्येक मनुष्य को गुरु बनाने की सीख दी
लालीवाव मठ में आयोजित भागवत कथा के
दौरान महंत हरिओमशरण महाराज ने कहा कि भागवत में मनुष्य योनी सबसे श्रेष्ठ
है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को गुरु बनाने की जरूरत होती है। महाराज ने कहा
कि भगवान का अवतार सत्य की रक्षा के लिए होता हैं। इस बीच भजनों पर कई
श्रद्धालु झूमने लगे तथा प्रेम पूर्वक भागवत कथा का श्रवण किया। कार्यक्रम
के दौरान पं. ललित पाठक के सानिध्य में मंगल यंत्र का निर्माण किया गया।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
वहीं कथा के बाद देर तक भजन कीर्तन का कार्यक्रम चला। इससे पूर्व अभिराम दास महाराज, मोहनलाल जोशी, उदयलाल तेली, विमल भट्ट, डॉ. लोकेश विश्वास, शांतिलाल भावसार, के. गौतम, सुखलाल तेली आदि भक्तों ने भागवत की पूजा की तथा व्यासपीठ का स्वागत किया। इस मौके पर पार्थिव शिवलिंग मंगलवार होने से मंगल यंत्र का निर्माण किया गया । आरती नंदकिशोर अग्रवाल, कांतिलाल सोनी, मगनलाल जोशी आदि ने की। संचालन शांतिलाल भावसार ने किया।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
वहीं कथा के बाद देर तक भजन कीर्तन का कार्यक्रम चला। इससे पूर्व अभिराम दास महाराज, मोहनलाल जोशी, उदयलाल तेली, विमल भट्ट, डॉ. लोकेश विश्वास, शांतिलाल भावसार, के. गौतम, सुखलाल तेली आदि भक्तों ने भागवत की पूजा की तथा व्यासपीठ का स्वागत किया। इस मौके पर पार्थिव शिवलिंग मंगलवार होने से मंगल यंत्र का निर्माण किया गया । आरती नंदकिशोर अग्रवाल, कांतिलाल सोनी, मगनलाल जोशी आदि ने की। संचालन शांतिलाल भावसार ने किया।
बांसवाड़ा. लालीवाव मठ में आयोजित भागवात कथा में मौजूद श्रद्धालु।
Monday, July 15, 2013
लालीवाव मठ में भागवत कथा शुरू ...
लालीवाव मठ में भागवत कथा शुरू l बांसवाड़ा,
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में लालीवाव मठ में सोमवार से श्रीमत भागवत कथा
प्रारंभ हो गई हैं। महंत हरिओम शरण महाराज ने कथा वाचन करते हुए कहा कि
भागवत कथा अमृत से गुरु ज्ञान मिलता है। उन्होंने पौराणिक
उदाहरण बताते हुए कहा कि कलयुग में मनुष्य आसुरी भाव का हो गया है तथा इस
भाव को दूर करने के लिए भागवत ज्ञान गंगा को सुनना जरूरी हैं। इसके प्रारंभ
में गणेश पूजा कर आठ दिवसीय महोत्सव को प्रारंभ किया। इस अवसर पर महाराज
ने शुक्रताल कथा, कमर कथा आदि के दृष्टांत सुनाए। कथा प्रारंभ होने पर
अभिराम दास, रामदास, के गौतम, महेश राणा, मोहनलाल जोशी, जोगेश्वरी भट्ट आदि
ने भागवत पूजा की। दूसरी ओर लालीवाव मठ में शिवभक्त साधकों ने पं.
इच्छाशंकर जोशी, घनश्याम जोशी आदि के सानिध्य में लक्ष पार्थेश्वर पूजा
महाविधान प्रारंभ किया गया। इस मौके पर रूद्राभिषेक, पंचाक्षरी मंत्र आदि
का विधान किया गया।
Wednesday, July 10, 2013
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